Daily Answer Writing
14 May 2022

Q) Critically examine the role of WHO in providing global health security during the Covid-19 pandemic. (150 words)

कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने में विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण करें। 


Introduction: The World Health Organization (WHO), headquartered in Geneva, Switzerland, is a specialized agency of the UN responsible for international public health. The WHO Constitution states its main objective as "the attainment by all peoples of the highest possible level of health".

 

Following measures focused on COVID-19 have taken place: 

  • Tracking mutations: the emergence of variants prompted the characterization of specific Variants of Interest (VOIs) and Variants of Concern (VOCs)to prioritize global monitoring and research, and ultimately to inform the ongoing response to the COVID-19 pandemic.  
  • Media briefings: The Director-General regularly made remarks, transcripts, videos, and audio recordings for these media briefings available online. There have been 41 Member State Briefings and information sessions.
  • Convening international expert networks, regarding topics such as clinical management, laboratory and virology, infection prevention and control, mathematical modeling, seroepidemiology, and research and development for diagnostics, therapeutics, and vaccines. These networks include thousands of scientists and medical and public health professionals from around the world.
  • The Strategic and Technical Advisory Group on Infectious Hazards (STAG-IH) provides independent advice and analysis to the WHO Health Emergencies Programme on the infectious hazards that may pose a threat to global health security.
  • Providing vaccination to critical populations: For example, Global Alliance for Vaccines and Immunisation (GAVI) is an alliance that brings together donor governments, WHO, UNICEF, World Bank, the vaccine industry, researchers other private philanthropists together.

 

Limitations of WHO's response to the pandemic

    • The long delay in declaring the Onset of the virus, and the reluctance of China to readily and quickly share vital information regarding the novel coronavirus, including the viral outbreak in Wuhan,
    • Not adequately investigating its origin: a stubborn refusal to allow the global agency to investigate, freely and fairly, the origin of the virus has highlighted the need to strengthen WHO.
    • Lower funding: For several years, the mandatory contribution has accounted for less than a fourth of the total budget, thus reducing the level of predictability in WHO’s responses; the bulk of the funding is through voluntary contribution.
    • Non-compliance: member states do not easily comply with the norms, and do not alert WHO in case of disease outbreaks that could cause global harm. Under the legally binding international health regulations, member states are expected to have in place core capacities to identify, report and respond to public health emergencies.
    • Vaccination approval process: The emergency use listing (EUL) of Covaxin was intentionally delayed by the health agency, which has no basis. 

 

Conclusion: PM Modi has recently called for reforms in WHO and there has been a demand for a review of the health agency’s processes on vaccine approvals. However, any reform in WHO should focus on transparency and accountability and should not dilute the vaccine approval process already in place.

 


 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), जिसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है, संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है जो अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार् है।      

इसका मुख्य उद्देश्य "सभी लोगों द्वारा स्वास्थ्य के उच्चतम संभावित स्तर की प्राप्ति" के रूप में बताया गया है।

 

कोविड-19 पर केंद्रित उपाय -

  • म्यूटेशन की निगरानी: नए-नए वेरिएंट के उद्भव ने वैश्विक निगरानी और अनुसंधान को प्राथमिकता देने और अंततः कोविड-19 महामारी के लिए चल रही प्रतिक्रिया को अद्यतन करने के लिए विशिष्ट वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (VoI) और वेरिएंट ऑफ कंसर्न (VoC) के लक्षण वर्णन को प्रेरित किया।  
  • संचार माध्यमों द्वारा लोगों को अवगत कराना: महानिदेशक ने नियमित रूप से  ऑनलाइन उपलब्ध मीडिया ब्रीफिंग के लिए टिप्पणी, टेप, वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग तैयार की। अबतक सदस्य देशों के साथ 41उल 41 ब्रीफिंग और सूचना सत्र आयोजित किए जा चुके हैं।
  • WHO द्वारा नैदानिक प्रबंधन, प्रयोगशाला और विषाणु विज्ञान, संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण, गणितीय मॉडलिंग, सेरोपिडेमियोलॉजी, और निदान, चिकित्सीय और टीकों के लिए अनुसंधान और विकास जैसे विषयों के बारे में अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ नेटवर्क का आयोजन किया गया। इन नेटवर्कों में दुनिया भर के हजारों वैज्ञानिक और चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवर शामिल हुए हैं।
  • संक्रामक खतरों पर रणनीतिक और तकनीकी सलाहकार समूह (STAG-IH) WHO को उन संक्रामक खतरों पर इसके स्वास्थ्य आपात स्थिति कार्यक्रम के लिये स्वतंत्र सलाह और विश्लेषण प्रदान करता है जो वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
  • बड़ी आबादी को टीके प्रदान करना: उदाहरण के लिए, ग्लोबल एलायंस फॉर वैक्सीन एंड इम्यूनाइजेशन (GAVI) एक गठबंधन है जो दाता सरकारों, डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ, विश्व बैंक, टीका उद्योग, शोधकर्ताओं अन्य निजी परोपकारियों को एक मंच पर लाता है।

 

महामारी के लिए डब्ल्यूएचओ की प्रतिक्रिया में सीमाएं

    • वायरस की शुरुआत की घोषणा करने में लंबी देरी, और वुहान में वायरल प्रकोप सहित नॉवल कोरोनावायरस के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी को आसानी से और जल्दी से साझा करने के लिए चीन पर दबाव बनाने में इसकी अनिच्छा।
    • वायरस उत्पत्ति की पर्याप्त रूप से जांच नहीं करना: वायरस की उत्पत्ति के संबंध में वैश्विक एजेंसी को स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से जांच करने की अनुमति देने में चीन के इनकार ने डब्ल्यूएचओ को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है।
    • कम वित्त: कुछ वर्षों से सदस्य राष्ट्रों द्वारा अनिवार्य योगदान कुल बजट के एक चौथाई से भी कम रहा है, जो डब्ल्यूएचओ की प्रतिक्रियाओं में भविष्यवाणी के स्तर को कम करता है; वित्त पोषण का बड़ा हिस्सा स्वैच्छिक योगदान के माध्यम से आता है। साथ ही चीन द्वारा वित्त-पोषण में सक्रियता उसकी अंतर्निहित महत्वाकांक्षा के कारण चिंताजनक है।
    • मानदंडों का उल्लंघन: सदस्य राज्य आसानी से मानदंडों का पालन नहीं करते हैं, और बीमारी के प्रकोप के मामले में डब्ल्यूएचओ को सतर्क नहीं करते हैं जिससे भयानक वैश्विक नुकसान हो सकते हैं। कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के तहत, सदस्य राज्यों से सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों की पहचान करने, रिपोर्ट करने और प्रतिक्रिया देने की उम्मीद की जाती है।
    • टीकाकरण अनुमोदन प्रक्रिया: WHO ने आपातकालीन उपयोग सूची (EUL) में कोवाक्सिन को शामिल करने में बिना आधार के देरी की। 

 

निष्कर्ष: भारतीय प्रधान मंत्री ने हाल ही में डब्ल्यूएचओ में सुधारों का आह्वान किया है और वैक्सीन अनुमोदन पर स्वास्थ्य एजेंसी की प्रक्रियाओं की समीक्षा की मांग की है। हालांकि,  डब्ल्यूएचओ में किसी भी सुधार में पारदर्शिता और जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और पहले से मौजूद वैक्सीन अनुमोदन प्रक्रिया को कमजोर नहीं करना चाहिए।

 

Submit your answer
Answers